फिजियोथेरेपी है इन 5 लाइलाज बीमारियों का इलाज

घुटनों का दर्द

एक उम्र के बाद घुटनों का दर्द एक आम समस्‍या बन गई है। घुटनों में मौजूद साइनोविल फ्लूड कम होने पर घुटने की ह‍ड्डियां आपस में रगड़ने लगती हैं और सर्फेस रफ हो जाता है, जिससे घुटनों में असहनीय पीड़ा होती है। घुटनों का दर्द अगर प्रारंभिक स्‍टेज में है तो फिजियोथेरेपी बहुत ही अच्‍छा विकल्‍प है। इसमें एक्‍सपर्ट अलग-अलग एक्‍सरसाइज के माध्‍यम से मरीज के मसल्‍स को मजबूत करते हैं, जिससे घुटने की उम्र 20 साल तक बढ़ जाती है और आपको पेन किलर नही खानी पड़ती है।

कमर का दर्द

अक्‍सर गलत पोश्‍चर या किसी तरह की दुर्घटना के कारण लोगों में कमर दर्द की समस्‍या रहती है। Low Back Pain की प्रॉब्‍लम सबसे ज्‍यादा देखने को मिलती है। दरअसल, हमारी बॉडी का सर्वाइक और लंबर प्‍वाइंट सबसे ज्‍यादा मूव होता है। जिससे Back Pain की समस्‍या होती है। ऐसी स्थिति में अगर फिजियोथेरेपी कराई जाए तो इस दर्द से आप छुटकारा पा सकते हैं। Back Pain या कमर दर्द में भी फिजियोथेरेपिस्‍ट अलग-अलग एक्‍सरसाइज के माध्‍यम से दर्द को को ठीक करते हैं।

फ्रैक्‍चर

फ्रैक्‍चर में सर्जरी के बाद होने वाले दर्द को भी फिजियोथेरेपी के माध्‍यम से बिना दवा के ठीक किया जा सकता है। इसमें एक्‍सपर्ट एक्‍सरसाइज की मदद से फ्रैक्‍चर के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत बना देते हैं। इसमें ज्‍वाइंट का मोबलाइजेशन किया जाता है, जिससे दर्द दूर हो जाता है।

अस्‍थमा

बदलती जीवनशैली में अस्‍थमा केवल बुजुर्गों को ही नही बल्कि कम उम्र के लोगों में देखने को मिल रही है। अस्‍थमा एक जानलेवा बीमारी है, जिससे ज्‍यादातर लोग ग्रसित होते हैं। इस समस्‍या से निजात पाने के लिए फिजियोथेरेपी अच्‍छा विकल्‍प हो सकता है। एक्‍सपर्ट के मु‍ताबिक, अस्‍थमा में मरीज को अलग-अलग ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज कराई जाती है, जिससे फेफड़े मजबूत हो जाएं और अस्‍थमा से निजात मिल सके।

गर्भावस्‍था में

फिजियोथेरेपी का प्रयोग स्‍त्री रोगों में भी किया जाता है। गर्भवती महिलाओं को अलग-अलग एक्‍सरसाइज कराई जाती है जिससे डिलीवरी में कोई प्रॉब्‍लम न हो। आमतौर डिलीवरी से पहले और बाद भी महिलाओं को फिजियोथेरेपी दी जाती है। अक्‍सर डिलीवरी के बाद महिलाओं का वजन बढ़ जाता है, मसल्‍स लूज हो जाते हैं। मसल्‍स को सही देने के लिए फिजिकल थेरेपी जरूरी होता है।

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